
पेट्रोल पर 13 से घटकर 3 रुपये, डीजल पर जीरो एक्साइज ड्यूटी… फ्यूल संकट के बीच सरकार ने दी बड़ी राहत
ग्लोबल कच्चे तेल की आपूर्ति संकट के बीच सरकार ने तेल कंंपनियों को बड़ी राहत दी है. पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी को घटा दिया है|पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये घटाकर 3 रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी जीरो कर दिया गया है|
सरकार ने यह तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है, क्योंकि उन्हें संकट के समय में महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा था, जिसे लेकर सरकार ने ये राहत दी है. हालांकि राज्य सरकारों का वैट लागू रहेगा. पहले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये था और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर था. हालांकि अब इसमें 10 रुपये की कटौती की गई है|
क्या पेट्रोल और डीजल के दाम होंगे कम?
इस कटौती का मतलब है कि तेल कंपनियों को सरकार ने राहत दी है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि इससे पेट्रोल और डीजल के दाम कोई कमी नहीं होगी. अभी जितना प्राइस है, उतना ही बना रहेगा. पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं होगा.
नायरा ने बढ़ाए फ्यूल के दाम
गुरुवार को देश की एक प्राइवेट तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए थे. इसने पेट्रोल पर 5 रुपये और डीजल पर 3 रुपये की बढ़ोतरी की थी. कंपनी का कहना था कि प्राइवेट कंपनियों को सरकार की ओर से राहत नहीं मिलता है, जिस कारण उसे अपने नुकसान की भरपाई के लिए फ्यूल प्राइस में इजाफा करना पड़ रहा है. देश भर में इसके 6,900 से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं.
देश में तेल का पर्याप्त भंडार
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से देश के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी मची थी. लोग यहां पेट्रोल और डीजल की पैनिंक बाइंग कर रहे थे. ऐसे में सरकार ने यह फैसला लेकर यह बताने का प्रयास किया है कि भारत में तेल की कोई कमी नहीं है. तेल कंपनियां बाहर से तेल खरीद रही हैं और उनके पास पर्याप्त भंडार मौजूद है. केंद्र सरकार ने भी कई बार स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की देश में कोई कमी नहीं है. तेल का भंडार देश में मौजूद है. लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है|
एक्साइज ड्यूटी में सरकार ने क्यों की कमी
यह कदम अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान को शामिल करने वाले चल रहे संघर्ष और तेहरान के होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण उत्पन्न गहरे वैश्विक ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि में आया है। यह एक महत्वपूर्ण मार्ग है जिससे दुनिया की लगभग पांचवीं हिस्से की कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है, जिसका अनुमान 20-25 मिलियन बैरल प्रति दिन है।
संघर्ष से पहले, भारत अपने कच्चे तेल के आयात का लगभग 12-15% हिस्सा इसी महत्वपूर्ण गलियारे के माध्यम से प्राप्त करता था। इस भारी कटौती से तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) पर लागत के दबाव में कमी आने की उम्मीद है और भू-राजनीतिक तनावों के कारण अस्थिर बनी हुई वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। बता दें कि हाल ही में रूस की देश में मौजूद पेट्रोलियम कंपनी नायरा ने पेट्रोल-डीजल में कल ही बढ़ोतरी की है। हालांकि अभी अन्य कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है। सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।
